पराक्रम दिवस: ICS की मखमली नौकरी ठुकराने वाले सुभाष चंद्र बोस कैसे बने भारत के ‘नेताजी’?
Parakram Diwas 2026: 23 जनवरी 1897 को ओडिशा के कटक में वो बालक जन्मा जिसने आगे चलकर ब्रिटिश हुकूमत की नींद उड़ा दी थी. सुभाष चंद्र बोस का व्यक्तित्व बचपन से ही अत्यंत मेधावी और क्रांतिकारी था. उन्होंने लंदन में सबसे कठिन आईसीएस परीक्षा में चौथी रैंक हासिल की थी. लेकिन उनका दिल केवल भारत की आजादी के लिए धड़कता था. 1921 में उन्होंने इस शाही नौकरी को लात मार दी और स्वदेश लौट आए. उन्होंने महात्मा गांधी और चितरंजन दास के साथ मिलकर आजादी की लड़ाई शुरू की. नेताजी केवल बातों में नहीं बल्कि ठोस कार्रवाई और पराक्रम में विश्वास रखते थे. उन्होंने देश और विदेश में घूमकर भारतीयों को संगठित करने का महान कार्य किया. उनकी रणनीति और ‘आजाद हिंद फौज’ के गठन ने अंग्रेजों को डरा दिया था. आज पूरा भारत उनके जन्मदिन को ‘पराक्रम दिवस’ के रूप में मनाता है.