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ब्रेन ट्यूमर के लक्षण क्या है, यह कैसे ठीक होता है? जानें बचाव के तरीके

brain-tumor ब्रेन ट्यूमर के लक्षण क्या है, यह कैसे ठीक होता है? जानें बचाव के तरीके

अक्सर सिरदर्द को हम महज थकान या तनाव मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि यही मामूली दिखने वाले लक्षण कभी-कभी ब्रेन ट्यूमर जैसी गंभीर और जानलेवा बीमारी का संकेत हो सकते हैं? यदि समय पर इनकी पहचान न हो तो यह घातक साबित हो सकता है. ब्रेन ट्यूमर के विषय में जागरूकता बढ़ाने और इससे जुड़े मिथकों को दूर करने के लिए, न्यूरोलॉजी विशेषज्ञ डॉ. वर्न वेलहो ने इससे संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है.

ब्रेन ट्यूमर क्या है और क्यों होता है?

परिभाषा: डॉ. वेलहो के अनुसार, ब्रेन ट्यूमर तब बनता है, जब मस्तिष्क (Brain) की कोशिकाएं (Cells) असामान्य रूप से और तेजी से बढ़नें लगती हैं. ये कोशिकाएं सामान्य कोशिकाओं से बदल जाती हैं और ब्रेन में एक ‘स्पेस ऑक्यूपाइंग रीजन’ (SOL) बना देती हैं.

मुख्य कारण: ब्रेन ट्यूमर का सबसे बड़ा कारण जीन्स में बदलाव (Mutation) होता है. इसके अलावा, कुछ अन्य कारण भी हो सकते हैं, जिन पर अभी भी शोध जारी है.

  • पारिवारिक (जेनेटिक) कारण: अगर परिवार में जीन का डिफेक्ट है, तो यह मां-बाप से बच्चे को भी जा सकता है.
  • रेडिएशन का एक्सपोजर: रेडिएशन के संपर्क में अधिक आना.
  • केमिकल्स: पेस्टिसाइड्स या पेट्रोलियम केमिकल्स के साथ काम करने वाले लोगों में, अगर वे उचित सुरक्षा (मास्क, ग्लव्स) नही लेते हैं, तो जोखिम बढ़ जाता है.
  • कमजोर इम्यूनिटी: शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यूनिटी) कम होने पर भी ट्यूमर का खतरा बढ़ जाता है.

ब्रेन ट्यूमर के प्रमुख लक्षण (Symptoms)

इन लक्षणोंको कभी नजरअंदाज़ नहीं करना चाहिए और ऐसे लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए:

  • गंभीर और लगातार सिरदर्द: यह सिरदर्द इतना तेज होता है कि रोगी सहन नहीं कर पाता और यह
    लगातार बढ़ता जाता है.
  • सिरदर्द के साथ उल्टी आना: अगर सुबह के समय सिरदर्द ज़्यादा हो और उसके बाद उल्टी आए, तो
    इसका मतलब है कि मस्तिष्क में दबाव (Brain Pressure) बढ़ रहा है. यह एक गंभीर चेतावनी है.
  • दौरे या झटके (Seizures/Fits): कभी-कभी मरीज़ को अचानक झटके आते हैं, वह बेहोश हो जाता है
    और 5 मिनट बाद वापस होश में आता है.
  • व्यवहार में बदलाव: रोगी के व्यवहार और बोलने के तरीके में परिवर्तन आ सकता है.
  • नजर में कमी (कमजोरी): आंखों की रौशनी कम होना.
  • हाथ-पांव में कमजोरी: शरीर के किसी हिस्से में कमज़ोरी महसूस होना.
  • बच्चों में खास ध्यान: अगर बच्चा बार-बार सिरदर्द की शिकायत करे, नजर कमजोर होने की बात कहे, या उसे खाने की इच्छा न हो और वह सुस्त बैठा रहे, तो तुरंत चेकअप कराना चाहिए.

इलाज की प्रक्रिया और नई तकनीकें

  • ब्रेन ट्यूमर के इलाज के प्रकार इस बात पर निर्भर करते हैं कि ट्यूमर सौम्य (Benign- धीरे बढ़ने वाला, कैंसर-रहित) है या घातक (Malignant तेज़ी से बढ़ने वाला, कैंसरस)
  • निदान (Diagnosis): पहला और सबसे जरूरी कदम सिटी स्कैन (CT Scan) और एमआरआई (MRI)
    के जरिए से ही निदान करना है.

इलाज के विकल्प

  • सर्जरी (Operation): अक्सर यह पहला और सबसे अहम कदम होता है, खासकर सौम्य ट्यूमर के लिए जो सर्जरी से पूरी तरह ठीक हो सकते हैं.
  • रेडियोथेरेपी (Radiotherapy) और कीमोथेरेपी (Chemotherapy): ये घातक (कैंसरस) ट्यूमर के लिए ऑपरेशन के बाद ज़रूरी हो सकते हैं.
  • टारगेटेड थेरेपी (Targeted Therapy): यह भी कैंसरस ट्यूमर के इलाज में इस्तेमाल होती है.
  • नई और सुरक्षित तकनीकें: न्यूरोसर्जरी में अब टेक्नोलॉजी बहुत एडवांस हो गई है, सर्जरी सुरक्षित हुई है:
  • हाई-एडवांस माइक्रोस्कोप: छोटी से छोटी जगह को मैग्नीफाई करके देखने के लिए.
  • नेविगेशन सिस्टम: इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और रोबोटिक टेक्नोलॉजी शामिल है, जो ट्यूमर की सटिक जगह ढूढंने में मदद करते हैं और सामान्य कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाए बिना ट्यूमर को निकालते हैं.

रिकवरी, परिवार का साथ और डॉक्टर का संदेश

  • रिकवरी का समय: सामान्य ऑपरेशन के बाद 10 से 15 दिन में टांके निकल जाते हैं और मरीज़ को 1-2 महीने घर पर आराम करना पड़ता है. जटिल ट्यूमर में ज़्यादा समय लग सकता है.
  • क्योर होने की संभावना: सौम्य (Benign) ट्यूमर, अगर समय पर डिटेक्ट हो जाए, तो पूरी तरह से क्यरेबल होते हैं. घातक ट्यूमर का इलाज लंबा होता है.
  • परिवार की भूमिका: परिवार का सपोर्ट सबसे अहम होता है. ब्रेन ट्यूमर जैसी बीमारी में मरीज को परिवार के भावनात्मक साथ की बहुत जरूरत होती है.

डॉक्टर का संदेश

  • हिम्मत रखें और जागरूक रहें.
  • अच्छा डॉक्टर, परिवार का साथ और सही इलाज ये तीन चीजें बहुत जरूरी हैं.
  • इलाज के बाद जीवन भर डॉक्टर के साथ फॉलो-अप (Follow-up) करना बेहद जरूरी है, ताकि बीमारी दोबारा न आए.

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