शिक्षक दिवस 2025: कौन था वो बालक, जिसने मृत्यु देवता यमराज को बनाया गुरु और जान लिया अमर आत्मा का रहस्य?

टीचर्स डे2025: हिंदू धर्म की गुरु-शिष्य परंपरा में अनेक प्रसंग मिलते हैं, लेकिन एक कहानी ऐसी है जो रहस्य और ज्ञान दोनों को समेटे हुए है. महज 10 साल का एक बालक नचिकेता, जिसने स्वयं मृत्यु देवता यमराज को गुरु बनाया और आत्मा की अमरता का वह रहस्य जान लिया जो आज भी कठोपनिषद में दर्ज है. यमराज भी टालते रहे जवाब, लेकिन नचिकेता ने जान लिया मृत्यु के बाद क्या होता है. यह कथा केवल एक शिष्य और गुरु की नहीं, बल्कि जीवन और मृत्यु के पार छिपे सत्य की खोज है.
नचिकेता का यमलोक गमन
नचिकेता ऋषि वाजश्रवस के पुत्र थे. कथा के अनुसार, महर्षि वाजश्रवा ने एक यज्ञ किया जिसमें वे अपनी संपत्ति दान कर रहे थे, लेकिन दान की जाने वाली गौएं बूढ़ी और दुर्बल थीं. यह देखकर नचिकेता ने अपने पिता से प्रश्न किया मुझे किसे दान करेंगे? क्रोधित पिता ने आवेश में कह दिया तुझे यमराज को दान करता हूँ. यही शब्द बने नियति और नचिकेता पहुंच गए यमलोक.
यमलोक में बालक की प्रतीक्षा
पिता की वाणी को सत्य मानकर नचिकेता यमलोक पहुंचे. उस समय यमराज वहां मौजूद नहीं थे. नचिकेता ने तीन दिन और तीन रात बिना अन्न-जल के धैर्यपूर्वक यमराज की प्रतीक्षा की. जब यमराज लौटे तो उन्होंने नचिकेता की तपस्या और धैर्य से प्रभावित होकर तीन वरदान देने का वचन दिया.
तीन वरदान और तीसरे का रहस्य
नचिकेता ने पहले दो वरदान सरल मांगे. पिता का क्रोध शांत हो. अग्नि विद्या का ज्ञान मिले. लेकिन तीसरे वरदान में उन्होंने पूछा- मृत्यु के बाद आत्मा का क्या होता है? यमराज ने पहले टालना चाहा. उन्होंने कहा,यह रहस्य देवताओं के लिए भी कठिन है कुछ और मांग लो लेकिन नचिकेता अडिग रहे. तब यमराज ने उन्हें आत्मा और मोक्ष का गूढ़ रहस्य बताया.
आत्मा का शाश्वत सत्य
यमराज ने कहा,आत्मा न जन्म लेती है, न मरती है. इसे कोई हथियार काट नहीं सकता, कोई अग्नि जला नहीं सकती, कोई जल भिगो नहीं सकता.आत्मा शाश्वत और अविनाशी है. यही नहीं, यमराज ने नचिकेता को योग, आत्मज्ञान और मोक्ष का मार्ग भी समझाया.
क्यों अद्वितीय है यह कथा?
इस प्रसंग में नचिकेता केवल एक बालक नहीं, बल्कि सत्य के खोजी साधक बन जाते हैं. वहीं यमराज केवल मृत्यु के देवता नहीं रहते, बल्कि एक ऐसे गुरु बन जाते हैं जो जीवन और मृत्यु से परे आत्मा की शाश्वतता का रहस्य खोलते हैं. यही कारण है कि नचिकेतायमराज की यह गाथा आज भी भारतीय दर्शन में ज्ञान और जिज्ञासा का सर्वोच्च उदाहरण मानी जाती है.
नचिकेता की अमर गाथा
इस प्रसंग ने कठोपनिषद को जन्म दिया, जो वेदांत दर्शन की आधारशिला है. नचिकेता केवल एक बालक नहीं, बल्कि सत्य की खोज का प्रतीक बन गए. उनका नाम आज भी लिया जाता है जब आत्मा, मृत्यु और मोक्ष के रहस्य की चर्चा होती है.
Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है. टीवी9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता है.